89+ Tehzeeb Hafi Shayari in Hindi | तहज़ीब हाफ़ी की बेहतरीन शायरी

Tehzeeb Hafi Shayari in Hindi

भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है
जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है
मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है
वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है

अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफ़े आ रहे हैं
कि घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं

यूँँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ
जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया
तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया
इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया

भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है
मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुमने इतने प्यार का करना क्या होता है

तहज़ीब हाफ़ी की बेहतरीन शायरी

कौन तुम्हारे पास से उठ कर घर जाता है
तुम जिसको छू लेती हो वो मर जाता है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वगैरा करती है
बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है
रोने में आसानी पैदा करती है

तेरे लहजे की नर्मी में जादू कुछ ऐसा है
कि गुस्सा भी लगे जैसे किसी फूल जैसा है

गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए
यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए
मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं
तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए

अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफ़े आ रहे हैं
कि घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं

Tehzeeb Hafi Shayari Lyrics

मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे
मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे
वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी
ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे

जैसे तुमने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो

मेरे आँसू नही थम रहे कि वो मुझसे जुदा हो गया
और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया

मेरी आँख से तेरा ग़म छलक तो नहीं गया
तुझे ढूंढ कर कहीं मैं भटक तो नहीं गया
ये जो इतने प्यार से देखता है तू आजकल
मेरे दोस्त तू कहीं मुझ से थक तो नहीं गया

हम एक उम्र इसी गम में मुब्तला रहे थे
वो सान्हे ही नहीं थे जो पेश आ रहे थे

Tehzeeb Hafi shayari mohabbat

ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में
मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता
चलो माना कि मेरा दिल मेरे महबूब का घर है
पर उस के पीछे उस के घर में क्या-क्या कुछ नहीं होता

मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे
मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे

गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए
यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए
मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं
तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए

ये दुक्ख अलग है कि उससे मैं दूर हो रहा हूँ
ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है

Tehzeeb hafi shayari tera chup rehna

मेरे आँसू नही थम रहे कि वो मुझसे जुदा हो गया
और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया
मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग
मैंने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया

जब से उस ने खींचा है खिड़की का पर्दा एक तरफ़
उस का कमरा एक तरफ़ है बाक़ी दुनिया एक तरफ़
मैं ने अब तक जितने भी लोगों में ख़ुद को बाँटा है
बचपन से रखता आया हूँ तेरा हिस्सा एक तरफ़

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